रौड़ि धौड़ि ऐजा,
रौड़ि धौड़ि ऐजा ।
हे म्यरा बाळापन,
फेर बौड़ि ऐजा ॥
जब कबि बणु मा
गोरु चराई,
दगड़यों दगड़ा ,
करिनि लड़ाई।
वूँ दिनु कि याद,
सि मन तैं भिजै जा,
हे म्यरा बाळापन ,
फेर बौड़ि ऐजा ||
तांदयों का ,
लगाई गीत,
घिचि चुप रै ,
आंख्यूँ मा प्रीत ,
किलै छुटि आज
ऐ कि बतै जा ,
हे म्यरा बाळापन
फेर बौड़ि ऐजा ॥
खेल खेलि रैनि ,
जख हमुन,
किलै हुंयुँ होलु,
आज सून |
कख हर्चीनी ,
सी दिन,
ऐकि दिखै जा ।
हे म्यरा बाळापन,
फेर बौड़ि ऐजा ।
तेरी कन्नु छौउं ,
मैं फेर जाग,
अब हौर न लगौ ,
मनमा मा आग ।
मीरु बिछड्युं आज
मै तैं मिलै जा ।
हे म्यरा बाळापन,
फेर बौड़ि ऐजा ॥
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